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Working women’s rights .. In Hindi Simplified

 

कामकाजी महिलाओं के अधिकार

  • हर कर्मचारी को कानून निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाना आवश्यक है जो सरकार द्वारा तय किया गया है I
  • समान कार्य के हित के लिए महिला वही वेतन पाने की अधिकारी है जो पुरुष को मिलता है I फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की धारा 92 एवं 94  के अंतर्गत इसका भुगतान ना करना एक दंडनीय अपराध है I
  • मालिक किसी भी कामगार से 9 घंटे से अधिक काम करवाने के लिए नहीं कह सकता I
  • कानून में दी गई अनुमति के अतिरिक्त मजदूरी में से कोई कटौती नहीं की जा सकती I
  • अतिरिक्त काम के लिए मालिक को दुगनी मजदूरी देनी होगी I
  • मजदूरी का भुगतान नदी में होना चाहिए I

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना:-

 

  • ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन की गारंटी की मजदूरी का काम देना आवश्यक है I
  • काम मांगने वालों में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं को प्राथमिकता I
  • 100 दिन की गारंटी वाला काम पूरे परिवार के लिए है और परिवार वाले साझे में इसे पूरा कर सकते हैं I
  • महिलाओं और पुरुषों को रोजगार का समान अधि
  • कार है और पुरुषों तथा महिलाओं को सप्ताह के आधार पर बराबर की मजदूरी दी जाएगी I
  • यदि किसी कामगार को 15 दिन के भीतर काम नहीं दिया जाता तो वह बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा I

 

फैक्ट्रियों में कार्यरत महिलाओं के अधिकार और सुविधाएं I

 

  • समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए और यह वेतन कम से कम उतना होना चाहिए जितना सरकार ने तय किया है, यानी, न्यूतम वेतन हर हाल में मिलना चाहिए I
  • महिलाएं एवं पुरुषों के लिए शौचालय और दरवाजे वाले अलग-अलग गुसल खाने होने चाहिए I
  • जहां 30 से अधिक महिलाएं काम करती हो , उस फैक्ट्री में एक “क्रेच” या झूलाघर यानी बच्चों की देखभाल के लिए जगह होनी चाहिए I
  • सफाई सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं होनी चाहिए I
  • महिलाओं से निश्चित वजन से ज्यादा वजन नहीं उठाया जा सकता I
  • महिलाओं से किसी चलती है मशीन को साफ करवाना या उसमें तेल लगवाना मना है I
  • महिलाओं से 1 सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं किया जा सकता I फैक्ट्री में ओवरटाइम का काम नहीं लिया जा सकता I
  • हफ्ते में 1 दिन का अवकाश यानी छुट्टी जरूर मिलनी चाहिए I
  • 5 घंटों से अधिक लगातार काम नहीं करवाया जा सकता बीच में आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य है I
  • काम सिर्फ सुबह 6:00 बजे से रात के 7:00 बजे के बीच ही करवाया जा सकता है

फैक्ट्री अधिनियम 1948 के तहत I

मातृत्व लाभ

  • प्रत्येक महिला मातृत्व लाभ पाने के हकदार है I
  • शिशु जन्म के कारण हुई अनुपस्थिति काल का वेतन मालिक द्वारा उस महिला को दिया जाएगा I
  • महिला चिकित्सीय बोनस को भी अधिकारी है I
  • शिशु जन्म से 6 सप्ताह पूर्व अथवा 6 सप्ताह पश्चात प्रत्येक महिला पूर्ण वेतन सहित छुट्टी को हकदार हैI
  • सरकारी कर्मचारी महिलाएं 180 दिन की पूर्व वेतन सहित छुट्टियां और महिलाओं के प्रति 15 दिन पितृत्व छुट्टियों के हकदार हैं I
  • महिला कामगार के गर्भधारण के अंतिम मास के दौरान उससे कोई भी भारी काम नहीं करवाया जा सकता I
  • गर्भपात हो जाने की स्थिति में गर्भपात के बाद महिला सप्ताह की पूर्ण वेतन सहित छुट्टियां पाने की हकदार है I
  • गर्भधारण प्रसव गर्भपात या समय पूर्व शिशु जन्म की वजह से बीमार होने की स्थिति में प्रत्येक महिला एक मास की छुट्टी और ले सकती है I
  • यदि नियोक्ता या मालिक के पास कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है तो प्रत्येक महिला ढाई हजार रुपए का चिकित्सीय बोनस की हकदार है I
  • गर्भ के चिकित्सीय समाधान करवाने पर महिला सवेतन छुट्टी की अधिकारी है I
  • बच्चे के जन्म के पश्चात बच्चे को दूध पिलाने के लिए 15 महीने तक प्रत्येक महिला को उचित समय दिया जाएगा I
  • यदि गर्भावस्था के दौरान या बच्चा  पैदा होने के बाद  मां की मौत हो जाती है  तब मां के वारिसों को प्रसूति के बाद के 6 हफ्तों का वेतन दिया जाएगा I
  • यदि जनों से पूर्व अथवा जन्म के बाद बच्चे की मृत्यु हो जाए तो भी महिला मातृत्व लाभ पाने की हकदार है I

                                                                     धन्यवाद |

 

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