The Bonded Labour System (Abolition) in Hindi

जाने बंधुआ श्रम प्रणाली के बरे में……..(अधिनियम, 1976)

bounded labour
labor law

बच्चे तब बंधुआ श्रमिक बन जाते हैं,  जिनके लिए उन्हें ऋणदाता के पास गिरवी रख दिया जाता है I बंधुआ बाल  श्रमिकों के साथ बुरा व्यवहार बहुत आम बात है I

  • आधा पेट भोजन और मनमाफिक काम ना होने पर पिटाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है I

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के निर्देशक ने बाल बंधुआ श्रम मजदूरों को परिभाषित करते हुए कहा है यह वही शोर नहीं है जो दिन के कुछ घंटे खेल और अध्ययन से निकाल कर यह खर्चे के लिए काम करते हैं I यह बच्चे हैं जो 10 से 18 घंटे काम करके कम वेतन पर अधीक्षण भेजते हैं बुनियादी शिक्षा और खेल से वंचित और कभी-कभी परिवार से अलग अलग होकर रहते हैं I

  • इस अमानवीय व्यवस्था प्रणाली में खतरनाक और अस्वल दशाओं में लंबे समय तक काम करने से बच्चों के शारीरिक मानसिक नैतिक आध्यात्मिक विकास और क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है I

  • बंधुआ बाल मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी प्राप्त नहीं होती है I साथ ही बंद प्रतिबंधित एवं फोन निषेध वाली प्रणाली में काम करते हैं, उन पर खतरा भी सबसे ज्यादा होता है और दुर्व्यवहार के सबसे अधिक शिकार भी होते हैं I

 

बंधुआ श्रम अधिनियम, 1976

  • बंधुआ मजदूरी को कानून द्वारा प्रतिबंधित करने के लिए  बंधुआ श्रम अधिनियम, 1976 अधिनियमित किया गया जो ऋण चुकाने के लिए किसी व्यक्ति को बंधुआ मजदूरी के लिए बात करने की व्यवस्था सुनिश्चित करता है ताकि जनसंख्या के कमजोर वर्गों के आर्थिक और वास्तविक शोषण को रोका जा सके I
  • बेगर की व्यवस्था अथवा बाध्यकारी मजदूरी के वे सभी लोग किसी व्यक्ति को बंधुआ मजदूरी के लिए बात भी करते हैं इस अधिनियम, के तहत कानून द्वारा दंडनीय अपराध है व अभिभावक या मां-बाप जो अपने बच्चे या परिवार के अन्य सदस्यों को बंधुआ मजदूरी के लिए बात करते हैं किसी व्यक्ति से इस तरह का समझौता करते हैं इस प्रावधान के अनुसार दंडित किए जाएंगे I
  • या अधिनियम बाल मजदूरों को बंधन से मुक्त कर उनके कार्यों को परिसमाप्त करने की बात करता है I

सर्वेक्षण

बंधुआ  प्रणाली अधिनियम ,1976 की धारा 14, के तहत सर्वेक्षण के माध्यम से बंधुआ मजदूरी प्रथा की पहचान की जिम्मेदारी सतर्कता समिति को सौंपी गई है बंदा मजदूरी का पता लगाने के लिए नियोक्ताओं के समक्ष अनेक प्रश्न रखे जाते हैं;

  1. क्या बिना श्रम कानून जैसी की न्यूनतम मजदूरी अधिनियम मजदूरी संदाय अधिनियम आदि का पालन किया जा रहा है ?
  2. क्या रजिस्टर तैयार किए जा रहे हैं ?
  3. ठेका श्रम अधिनियम अथवा अन्य किसी आवश्यक कानून के अंतर्गत पंजीकृत है ?

बाल मजदूरों की  सूचना

  • अधिकारों की रक्षा करने से करने में असमर्थ होता है यदि कहीं बंधुआ मजदूरी की प्रथा प्रचलित है तो उसकी सूचना जिलाधिकारी किसी सामाजिक कार्यकर्ता एनजीओ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी स्थानीय सतर्कता समिति ने अपराधी को दी जानी चाहिए I

बंधुआ मजदूरी की बचाव प्रक्रिया

मानव दुर्व्यवहार पर एक गंभीर अपराध है और मानव अधिकारों का भी उल्लंघन है इसके उन्मूलन के लिए एक अधिकार आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता है यह सुनिश्चित करें कि यह कानून पीड़ितों की सहायता कर रहे हैं और अपराधियों को दंडित कर रहे हैं I

बचाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक चरण

  1. साझेदारों के सहयोग से पीड़ितों के लिए एक उचित बचाव अभियान की योजना
  2. बचाओ और स्वदेश वापसी के दौरान पीड़ितों की सहायता
  3. इसके बाद मुआवजा और पुनर्वास
  4. अपराधियों को सजा दुर्व्यवहार करने वालों के साथ-साथ उनके नियोक्ताओं को भी
  5. कानून को शीघ्रता से और समय से प्रभावी तरीके से लागू करना
  6. कोई बात पीड़ितों के उत्पीड़न या परेशानी का कारण न बने

 

  • पुनर्वास

बंधुआ मजदूर के पुनर्वास के दो अलग-अलग घटक है

  • मनोवैज्ञानिक पुनर्वास
  • शारीरिक और आर्थिक पुनर्वास
  • मनोवैज्ञानिक पुनर्वास
  • बचाए हुए बंधुआ मजदूर को इस बात के लिए आश्वस्त करना और विश्वास दिलाना बहुत जरूरी है कि वह एक इंसान है उसे भी आज भी का पानी और और आर्थिक रूप से संपन्न होने तथा एक सभ्य जीवन जीने का अधिकार है जब तक उसे मनोवैज्ञानिक ढंग से आश्वस्त नहीं किया जाएगा कि उसके भाग को नियंत्रित नहीं कर सकता तब तक पूरी संभावना है कि वह फिर से दूर व्यापार और बंधनों के दुष्चक्र की चपेट में आ जाएगा
  • आर्थिक पुनर्वास की विभिन्न घटक
  • अधिकारों का संरक्षण
  • कृषि भूमि और घर साइड का बटन
  • कम लागत की आवास इकाइयों का प्रावधान
  • कृषि पशु पशु पालन डायरी फॉर लॉटरी चारा की खेती आदि
  • उच्च न्यायालय की घोषणा निर्णय
  1. बंधुआ मजदूर के संबंध में मामला बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत संघ एवं  1984 दोएस एससीआर कथा इस मामले में मजदूरों के उत्थान के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई हरियाणा में मजदूर बहुत बड़ी संख्या में पत्थरों की खदानों में अमान्य वातावरण में बिना किसी चिकित्सा सुविधा एवं सुरक्षा नियमों तथा बहुत कम वेतन पर काम कर रहे थे इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा कि बंधुआ मजदूरों की पहचान की जानी चाहिए उन्हें चाहिए तथा उनका उचित रूप से किया जाना चाहिए I

  2. 1982 पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स बनाम भारत संघ के मामले में मजदूरों के हितों से संबंधित याचिका की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दिए जाने को बेकार की संज्ञा दी तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लंघन बताया कि राज्य अधिनियम को पा सके I

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

email: kanoonkisamajh@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *