The Prohibition of Child Marriage In Hindi

बाल विवाह से आप क्या समजते हैं……. जाने बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006.

बाल विवाह प्रतिबंधित

  • बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006, 21 वर्ष की आयु से कम के किसी लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की का विवाह किए जाने को प्रतिबंधित करता है I

 

  • दंडनीय अपराध – बाल विवाह भारत में अवैध और प्रतिबंधित है I

 

  • बाल विवाह का दोषी कौन है ?

बाल विवाह कराने वाले माता – पिता,  शादी में शामिल बराती ,शादी संपन्न पुराने वाले पंडित या धर्म गुरु, रिश्तेदार, दर्जी, नाई, रसोईया, बैंड वाले आदि इस अधिनियम के अनुसार दोषी माने जाएंगे और इन सब के खिलाफ कारवाही की जाएगी I

 

  • बाल विवाह की शिकायत किससे और कहां करें ?
  1. डायल 1098, 1090, 181, और 100 नंबर पर ;
  2. बाल विवाह रोकथाम अधिकारी (अधिनियम में परिभाषित संरक्षण अधिकारी) से;
  3. नजदीकी पुलिस थाने में ;
  4. जिलाधिकारी से ;

 

  • शिकायत कौन कर सकता है ?
  1. बालक या बालिका खुद ;
  2. रिश्तेदार या कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे विवाह की जानकारी हो I
  • बाल विवाह रोकथाम अधिकारी या अन्य किसी भी व्यक्ति की सूचना पर बाल विवाह को रोका जा सकता है I
  • न्यायालय बाल विवाह रोकने के लिए अविलंब सेट जारी कर सकता है I
  • न्यायिक मजिस्ट्रेट ऐसे आदेश दे सकते हैं और इसे रोकने के लिए इलाके की पुलिस की मदद ली जा सकती है I
  • पुलिस आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर सकती है और दोषियों पर सजा या जुर्माना हेतु केस दर्ज किया जाएगा I

 

  • विवाह होने पर शिकायत ?
  • विवाह बंधन में आने के बाद किसी भी बालक या बालिका की अनिच्छा होने पर उस बाल विवाह को न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जा सकता है I
  • न्यायालय मैं अर्जी फाइल किए जाने के समय अर्जित दाल यदि आवश्यक है तो अर्जी उसके संरक्षक या वाद मित्र के साथ साथ बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के माध्यम से दी जा सकेगी I
  • बाल विवाह के बंधन मैं बालक बालिका व्य्षक होने के 2 साल के भीतर जिला न्यायालय में अर्जी दायर कर सकते हैं I

 

  • बाल विवाह रोकने हेतु एवं राहत के लिए याचिका
  • बाल विवाह कानून के तहत किसी भी राहत के लिए संबंधित नियम लिखित जिला न्यायालय में अर्जी दी जा सकती है I
  • प्रतिवादी के निवास स्थान से संबंधित जिला न्यायालय I
  • बाल विवाह के स्थान पर;
  • जिस जगह पर दोनों पक्ष पहले एक साथ रह रहे थे I
  • याचिकाकर्ता वर्तमान में जहां रहा है रहा हो उससे संबंधित जिला न्यायालय;

 

  • बाल विवाह निषेध अधिकारी के कर्तव्य
  • उचित कार्यवाही से बाल विवाह रोकना;
  • कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध प्रमाण इकट्ठे करना;
  • समुदाय मैं लोगों से सलाह मशवरा करना;
  • समुदाय के लोगों में जागरूकता पैदा करना;
  • बाल विवाह निषेध अधिकारी के पास बच्चे के अभी रक्षण भरण पोषण और न्यायिक मजिस्ट्रेट की गई शिकायत के संदर्भ में न्यायालय में आवेदन करने की शक्ति होगी I
  • अक्षय तृतीया जैसे सामूहिक बाल विवाह के अक्षर पर जिला मजिस्ट्रेट को बाल विवाह निषेध अधिकारी की शक्तियां दी जाएगी ;
  • आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने वाला विवाह निषेध अधिकारी को पुलिस अधिकारी की शक्तियां दी जाएगी I

[ बाल विवाह निषेध कानून का पालन करने के उद्देश्य से उठाए गए किसी भी कदम के लिए बाल विवाह निषेध अधिकारी के विरोध कानूनी कारवाही नहीं की जा सकती I

  • बाल विवाह अधिनियम, 2006
  • धारा 9,प्रावधान वयस्क रुष 18 वर्ष से ऊपर के लिए सजा जो एक बालिका से शादी कर रहा, दंड 2 वर्ष तक का कठोर कारावास अथवा ₹100000 रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों
  • धारा 10, प्रावधान बाल विवाह को गंभीरता से लेने उसका उत्सव मानने के लिए सजा( बाल विवाह संचालन कार्यक्रम का आयोजन या निर्देश), दंड 2 वर्ष तक का कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है
  • धारा 11, प्रावधान बाल विवाह के आयोजन के लिए प्रचार या अनुमति देने के लिए सजा, दंड 2 साल तक का कठोर कारावास और ₹100000 रुपए तक का जुर्माना
  • धारा 12, प्रावधान यदि विवाह के लिए बालय्या वाली का को उसके कानूनी अभी रक्षक से दूर ले जाया जाए या उसे किसी दूसरे स्थान पर जाने के लिए मजबूर किया जाए या विवाह के लिए बेचा जाए या विवाह के बाद मानव दुर्व्यापार किया जाै या न्यायिक आदेश का उल्लंघन करके बाल विवाह आयोजित करवाया जाए, दंड ऐसी शादी निरर्थक और शुन्य होगी
  • इस अधिनियम के तहत महिलाओं को दंडित नहीं किया जा सकता है

 

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